किसान भाइयों आज हमे जीवामृत से खेती करने की बहुत ही आवश्यकता है। क्योंकि जिस प्रकार रसायनिक उर्वरको का आंख बंद कर के बड़ी भारी मात्रा मे प्रयोग हुआ है उसने हमारी भूमि की संरचना ही बदल कर रख दी है। आज बहुत ही तेजी से खेती योग्य भूमि बंजर भूमि में बदलती जा रही है। और लाखों करोड़ रुपया किसानों का रासायनिक उर्वरकों पर खर्च हो रहा है। खेतो मे लगातार रासायनिक उर्वको के प्रयोग से फसल की पैदावार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।अधिक खर्च और कम उत्पादन के कारण ही किसान भाई कर्ज से दबे हुए है। साथ ही हमारे खाने से होकर ये जहर हमारे स्वास्थ्य को भी खराब कर रहा है।किसान भाई खेती में मुनाफा कमाने के दो ही तरीके है एक तो यह की लागत कम कर दे तथा दूसरा यह की अपनी फसल को बेचने पर भाव अधिक मिल सके | | किसान भाई खेती में मुनाफा कमाने के दो ही तरीके है एक तो यह की लागत कम कर दे तथा दूसरा यह की अपनी फसल को बेचने पर भाव अधिक मिल सके | भाव तो किसान के हाथ में नहीं है परन्तु उसकी लागत कम करना किसान के बस में है, इसके लिए किसान को जैविक खेती की तरफ बढ़ना होगा | इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है रासायनिक उर्वरकों की जगह अधिक से अधिक जैविक खादों का प्रयोग करना। जिनमे कम्पोस्ट खाद, वर्मीकम्पोस्ट, जीवामृत,गोमूत्र आदि का प्रयोग करना है।इस लेख में हम जीवामृत के बारे में जानकारी दे रहे है। जिसे किसान भाई कम लागत मे अपने ही घर पर बनाकर खेतो मे प्रयोग करके अधिक लाभ ले सकते है।

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जीवामृत क्या है?

किसान भाईयो जीवामृत एक अत्यधिक प्रभावशाली जैविक खाद है। जिसे गोबर के साथ पानी मे कई और पदार्थ मिलाकर तैयार किया जाता है। जो पौधों की वृद्धि और विकास में सहायक है। यह पौधों की विभिन्न रोगाणुओं से सुरक्षा करता है तथा पौधों की प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाता है जिससे पौधे स्वस्थ बने रहते हैं तथा फसल से बहुत ही अच्छी पैदावार मिलती है।किसान भाई जीवामृत अपने खेत में ही बना सकते हैं

जीवामृत बनाने की विधि

किसान भाईयो तरल जीवामृत बनाने के लिए हमे निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होती है।

1- देशी गाय का 10 किलो गोबर

2- 10 लीटर गाय का गौमूत्

3- गुड़ 1 किलो

4- किसी भी प्रकार की दाल का 1 किलो आटा (मूंग, उर्द, अरहर, चना आदि का आटा)

5- बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी

6- 200 लीटर पानी

7- एक बड़ा पात्र (ड्रम आदि)

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नोट:
बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी सबसे अच्छी होती है क्योंकि बरगद और पीपल के पेड़ हर समय ऑक्सीजन देने वाले पेड़ हैं और ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पेड़  के नीचे जीवाणुओं की संख्या अधिक पाई जाती है। ये जीवाणु खेत के लिए बहुत ही आवश्यक एवं लाभदायक हैं।

ये सब सामग्री इकट्ठा करके सबसे पहले 10 किलोग्राम देशी गाय का गोबर, 10 लीटर देशी गौमूत्र, 1 किलोग्रामगुड़ ,1 किलोग्राम किसी भी दाल का आटा, 1 किलोग्राम बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी 200 लीटर पानी को एकप्लास्टिक के ड्रम में डालकर किसी डंडे की सहायता से इस मिश्रण को अच्छी तरह हिलाये जिससे ये पूरी तरह से मिक्स हो जाये। अब इसड्रम को ढक कर छांव मे रखदे। इस मिश्रण पर सीधी धूप नही पड़नी चाहिएअगले दिन इस मिश्रण को फिर से किसी लकड़ी की सहायता से हिलाए, 6 से 7 दिनों तक इसी कार्य को करते रहे। लगभग 7 दिन के बाद जीवामृत उपयोग के लिए बनकर तैयार हो जायेगा।

किसान भाईयो विशेषज्ञ बताते है कि देशी गाय के 1 ग्राम गोबर में लगभग 500 करोड़ जीवाणु होते हैं। जब हम जीवामृत बनाने के लिए 200 लीटर पानी में 10 किलो गोबर डालते हैं तो लगभग 50 लाख करोड़ जीवाणु इस पानी मे डालते हैं  जीवामृत बनते समय हर 20 मिनट में उनकी संख्या दोगुनी हो जाती है। जीवामृत जब हम 7 दिन तक किण्वन के लिए रखते हैं तो उनकी संख्या अरबों-खरबों हो जाती है। जब हम जीवामृत भूमि में पानी के साथ डालते हैं, तब भूमि में ये सूक्ष्म जीव अपने कार्य में लग जाते हैं तथा पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। इस तरह से आप अपने खेती का लागत कम कर सकते हैं |

 जीवामृत को कैसे प्रयोग करे?

किसान भाई इसजीवामृत को कई प्रकार से अपने खेतों मे प्रयोग कर सकते है। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है फसल में पानी के साथ जीवामृत देना जिस खेत में आप सिंचाई कर रहे हैं उ जीवामृत पानी में मिलकर अपने आप फसलों की जड़ों तक पहुँचेगा।  इस प्रकार जीवामृत 21 दिनों के अंतराल पर आप फसलो को दे सकते है।  फलदार पेड़ो फलदार पेड़ों में 1 लीटर एक पौधे के अनुसार डाल सकते हैंजीवामृत महीने में दो बार पानी के साथ दीजिए। जीवामृत छिडकते समय भूमि में नमी होनी चाहिए।

जीवामृत का प्रयोगसभी प्रकार के फलदार पेड़ों के साथ ही अन्यफसलो में कर सकते हैं। इसका कोई नुकसान नही है।

जीवामृत के प्रयोग से होने वालेे लाभ-

1-  जीवामृत पौधे को अधिक ठंड और अधिक गर्मी से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।
2-  फसलो पर इसके प्रयोग से फूलों और फलों में वृद्धि होती है।
3-  जीवामृत सभी प्रकार की फसलों के लिए लाभकरी है।
4-  इसमें कोई भी नुकसान देने वाला तत्व या जीवाणु नही है।
5-  जीवामृत के प्रयोग से उगे फल,सब्जी, अनाज देखने में सुंदर और खाने में अधिक स्वादिष्ट होते है।
6-  पौधों में बिमारियों के प्रति लड़ने की शक्ति बढ़ाता है।
7-  मिट्टी में से तत्वों को लेने और उपयोग करने की क्षमता बढ़ती है।
8-  बीज की अंकुरन क्षमता में वृद्धि होती है |
9-  इससे फसलों और फलों में एकसारता आती है तथा पैदावार में भी वृद्धि होती है।

जीवामृत का लगातार उपयोग भूमि पर क्या असर डालता है?

1-  किसान भाईयो जीवामृत के लगातार प्रयोग करने से भूमि में केचुआ और अन्य लाभदायक सूक्ष्म जीव जैसे- शैवाल, कवक, प्रोटोजोआ व  बैक्टीरिया इत्यादि में वृद्धि होती है जो पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
2-  भूमि की उर्वरा शक्ति मे वृद्धि होती है।
3-  भूमि के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों में भी इसके प्रयोग से सुधार होता है जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है।
किसान भाईयो हमे अपने खेतों मे रासायनिक खादों को कम करके जैविक खादों को बढ़ावा देना चाहिए। जीवामृत तो खेती के लिए वरदान है। क्यू कि जब हम भूमि में जीवामृत डालते हैं, तब 1 ग्राम जीवामृत में लगभग 500 करोड़ जीवाणु डालते हैं। वे सब पकाने वाले जीवाणु होते हैं। भूमि तो अन्नपूर्णा है लेकिन जो है, वह पका हुआ नहीं है। पकाने का काम ये जीवाणु करते हैं। जीवामृत उपयोग में लाते ही इसके जीवाणु हर प्रकार के  अन्नद्रव्य (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, लोहा, गंधक, जिंक आदि) को पकाकर पौधों की जड़ों को उपलब्ध करा देते हैं। भूमि पर जीवामृत डालते ही एक और चमत्कार होता है, भूमि में करोड़ों केंचुए अपने आप काम में लग जाते हैं, उन्हें बुलाना नहीं पड़ता। ये केंचुए भूमि के अन्दर लगभग 15 फुट से खाद पोषक तत्वों से समृद्ध मिट्टी मल के माध्यम से भूमि की सतह के ऊपर डालते हैं, जिसमें से पौधे अपने लिए आवश्यक सभी खाद पोषक तत्व बड़ी ही सुलभता से चाहे जितनी मात्रा में ले लेते हैं। घने जंगलों में अनगिनत फल देने वाले पेड़ पौधे कैसे जीते हैं ? वे अन्नद्रव्य कहाँ से लेते हैं ? उन्हें केंचुए और सूक्ष्म जीव-जन्तु ही खिलाते और पिलाते हैं। इन केंचुओं के मल में मिट्टी से सात गुना ज्यादा नाइट्रोजन, नौ गुना ज्यादा फास्फोरस, ग्यारह गुना ज्यादा पोटाश, छह गुना ज्यादा कैल्शियम, आठ गुना ज्यादा मैग्नीशियम, व दस गुना ज्यादा गंधक होता है। यानि फसलों और फल पेड़-पौधों को जो जो चाहिए वह प्रचुर मात्रा में होता है

 

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