महिला दिवस विशेष -संतोष देवी ने जैविक खेती कर बनाई अपनी अलग पहचान

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आज कृषि के क्षेत्र में महिलाएं बढ़-चढ़कर नित्य नए प्रयोग कर रही हैं। फिर चाहें वो मुर्गीपालन हो या फिर मिश्रित खेती, बागवानी हो या फिर मौन पालन या डेयरी उद्योग, कृषि के हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कुछ नए आयाम भी महिलाओं ने खोजकर अपनी धाक जमाई है।

कृषि के जिन क्षेत्रों में पुरूषों ने कब्जा किया हुआ था वहां आज महिलाओं ने आकर अपना स्थान बनाया और पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाने के बजाय वे उन्हें काफी पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गई हैं और अपनी कल्पनाशक्ति का लोहा मनवा रही हैं।क्या कभी किसी ने सोचा था कि चूड़ियों से भरे हाथ कभी हल या ट्रैक्टर का स्टीयरिंग थामेंगे? शायद ही यह परिकल्पना किसी के जहन में आई होगी कि घूंघट में सिमटा चेहरा आज समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाएगा और उभरकर सामने आएगा। मां के दामन में छिपी वो छोटी सी कल्पना अपने ही पंख लगाकर खुले गगन में उड़ेगी और अपने वजूद को एक पहचान देगी।

कृषि जागरण भी ऐसी सभी महिलाओं को नमन करता है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के आगे घुटने न टेकते हुए अपने सपनों को साकार किया और आज कृषि क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं।सीकर के ग्राम बेरी की रहने वाली संतोष चैधरी का यूं तो बचपन से ही खेती से नाता रहा है लेकिन वर्ष 2008 में उन्होंने कृषि में ऊंचाइयों को छूने की ओर कदम बढ़ाया। श्रीमति संतोष के पति सीकर में ही होमगार्ड की नौकरी करते थे। ज्यादा आमदनी न होने व 3 बच्चों सहित पूरे परिवार का पालन-पोषण करना संभव नहीं हो पा रहा था इसलिए उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने की ठानी। उन्होंने कृषि उद्यान विभाग से कुछ अनार के पौधे लिए और उन्हें अपने बगीचे में रोपा। थोड़े समय बाद इनमें फल आने शुरू हो गए। ड्रिप इरीगेशन के माध्यम से उन्होंने अपने बगीचे की सिंचाई की। वर्ष 2011 में उन्होंने कृषि उद्यान विभाग को 400 ग्राम तक के अनार दिये 2017-18 में कृषि मंत्री प्रभु लाल जी सैनी  को  870 gram का अनार भेट किया! यही नहीं उन्हें लगभग 30 किलो औसत अनार हर महीने प्राप्त होने शुरू हो गए।महिला दिवस पर एक और उपलब्धि

उन्होंने कटिंग तकनीकी के माध्यम से कच्ची फुटान को काटना आरंभ किया। परिणामस्वरूप उन्हें अच्छे व बड़े आकार के फल प्राप्त होने लगे क्योंकि पोषण फुटान में न जाकर सीधा फलों तक पहुंचने लगा। यही नहीं उन्हें इतना मुनाफा हुआ कि उन्होंने 1 हैक्टेयर जमीन पर 230 अनार के पेड़, 150 बेलपत्र 25 पेड़ सेव व 140 मौसमी के पेड़ लगाए हैं। वहीं अतिरिक्त आमदनी के लिए उन्होंने 10 नींबू व 10 अमरूद के पेड़ भी लगाए हैं।

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