सेब के पौधे पर फल लगे हुए

राजस्थान में शेखावटी का मौसम सेब की खेती के अनुकूल नहीं है। यहां धूलभरी आंधियां, गर्मी में 45 डिग्री के पार पारा और सर्दियों में हाड़ कंपाकंपा देने वाली सर्दी। इन चुनौतियों के बाद भी यहां सेब उगाने का प्रयास किया तथा सफल हुए। हिमाचल और कश्मीर की मुख्य उपज सेब की राजस्थान के सीकर में खेती का नवाचार बेरी गांव के किसान  रामकरण सिंह कर रहे है। वे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन से जुड़े हैं। सिंह बताते हैं कि राजस्थान की धरती पर सेब की खेती के प्रयास नए तो नहीं हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। अब तीन साल बाद यह सफलता मिली है। बेरी गांव से पहले सेब की खेती का प्रयास जयपुर के दुर्गापुरा में भी किया गया। वहां सौ पौधे लगाए गए थे, लेकिन वे नष्ट हो गए। इसी तरह सीकर के ही दो अन्य जगहों पर भी यह प्रयास किया गया, लेकिन उनमें अंकुर नहीं फूट पाया। फिर बेरी में यह प्रयास किया गया। तथा सेव की खेती करने में सफलता हासिल की

“किसान रामकरण बताते हैं कि मुझे NIF के द्वारा 2015 में मुझे एक सेव की कलम मिली जिसको हमने हमारे बगीचे में लगाया धीरे धीरे कलम पौधा बनकर तैयार हुई तथा दूसरी साल में ही 36 फल लगे”

उद्यान विभाग व कृषि विभाग के अधिकारी सेब के पौधे में लगे हुए फल देखने के लिए आए अधिकारी बताते हैं कि हमें यकीन नहीं हो रहा है कि राजस्थान में सेव की खेती करके सफलता पाई यह सपने से कम नहीं है फिर जब पौधा 3 साल का हुआ तो पौधे में 132 फल आए उनका वजन 250 ग्राम से 300 ग्राम तक पहुंच गया था उनका रंग हल्का पीला गुलाबी हुआ|

नीचे दिए हुए वीडियो पर क्लिक करें और सेव की खेती के बारे में पढ़ें

 किसान रामकरण सिंह बताते हैं कि सेब की खेती करने के लिए सबसे जरूरी था कि पौधे की टहनियों की कटिंग खास तरह से  की बिल्कुल उसी तरह जिस तरह अनार की अमरेला कटिंग की जाती है सेब के पौधे में जैविक खाद व कीटनाशक का उपयोग किया जिससे फलों मिठास में वृद्धि हुई | जैविक विधि से तैयार किए गए फल खाने में स्वादिष्ट तथा मुलायम होते हैं पौधों में सिंचाई की पूर्ति करने के लिए बूंद बूंद सिंचाई विधि का प्रयोग किया गया जिसका परिणाम है कि हिमाचल और कश्मीर में बहुतायत में उगने वाली सेव रेगिस्तान में मिलेगी |

कृषि वैज्ञानिक

किसान रामकरण खेदड़ की ओर से सेव की खेती में अपनाई गई तकनीक इतनी कारगर साबित हुई है कि पैदावार का आंकड़ा 4 गुना बढ़ गया है उद्यान विभाग के अधिकारियों का दावा है कि सेव की खेती में किसान का पहला प्रयास है जो बड़े स्तर पर कारगर साबित हुआ है किसान रामकरण खेदड़ के ही प्रयासों का नतीजा है कि जम्मू व हिमाचल के बाद अब राजस्थान में भी 50 डिग्री तापमान पर सेव की खेती होगी |

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रामकरण को 2 साल पहले सेव की प्रायोगिक खेती में बड़े स्तर पर सफलता मिली उन्होंने 4 साल में फल देने वाली किस्म से महज 2 साल मे पैदावार लेकर दिखाया खास बात यह है कि 25 से 30 डिग्री तापमान में फल देने वाली सेव की किस्म HRMN-99 शेखावाटी की जलवायु में 50 डिग्री तापमान पर फल दे रही है तथा खास बात यह है कि यह मई-जून में तैयार होती है


 SHRI PAWAN KUMAR Goal (COMMISSIONER, AGRICULTURE PRODUCTION AND ADDITIONAL CHIEF SECRETARY TO GOVERNMENT, AGRICULTURE AND HORTICULTURE DEPARTMENT, RAJASTHAN, JAIPUR)  VISIT OUR APPLE FARM

पौधों की नर्सरी

सेब की खेती फलने लगी है और मई में सेब की फसल मिल जाएगी इस सफलता को लेकर कृषि उद्यान अधिकारी भी उत्साहित है कृषि अधिकारी व उद्यान अधिकारी पर सेव के पौधेकी जानकारी के लिए भ्रमण पर आते हैं इस बारे में राज्य सरकार के उद्यानिकी मुख्यालय जयपुर ने भी सीकर के अधिकारियों से सूचना मांगी है  किसान रामकरण खेदड़ ने सेव की किस्म HRMN – 99 के 4000 पौधों की नर्सरी तैयार की है रामकरण खेदड़ बताते हैं कि राजस्थान ,गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश से पौधों की मांग आ रही है

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किसान भाइयों को जागरूक करने का एक छोटा सा प्रयास पाठकों को कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया नीचे Comment के जरिए जरुर दीजिए, आपकी प्रतिक्रिया का हमें इंतजार रहेगा, और लेख अच्छा लेगे तो Like और Share जरुर करे|

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