किसान अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिये ये काम करना जरुरी हे वह अपनी फसल की लागत को कम कर सकते हे भाव हमेशा किसान के ऊपर निर्भर नहीं करता हे

 

अब भाव बढ़ना और कम होना किसान के हाथ में नहीं हे इसके लिये किसान को अपनी लागत कम करनी होगी किसान अपनी लागत को जैविक खेती की सहायता से ही कम कर सकते हैं

जीवामृत बहुत अधिक गुणवत्ता और पोषण वाला खाद होता हे यह पोधो के विकास और उत्पादन में बहुत ही अधिक महत्वपूर्ण खाद होता हे इसे गोबर , गोमूत्र , गुड़  को मिक्स करके बनाया जाता हे

 

इसके उपयोग से अत्यधिक उत्पादन मिलता हे किसान भाई इसे बहुत ही आसानी से कम खरच में अपने खेत पर ही तैयार कर सकते हे यह पौधे के बहुत से रोगो में रोकथाम करता हे

इसमें कुछ ग्राम में ही करोडो की संख्या में जीवाणु होते हे जीवामृत जैविक खेती का सबसे महत्वपूर्ण भाग हे जिसके कारण जैविक खेती में हम बहुत अच्छा उत्पादन कर सकते हे

जीवामृत को बनाने के लिए आवश्यक सामग्री जिनकी हमें आवश्यकता है

200 लीटर  पानी का डर्म ( ढोल )

10 किलो देशी गाय का ताजा गोबर ( किसी भी देशी किस्म की गाय का गोबर )

10 किलो गाय का ताजा गोमूत्र

2 किलो पुराना देशी गुड़

2 किलो दाल का आटा या बेसन ( जो किसी भी दाल मुंग उड़द चना अरहर का ले सकते हे

 

किसान इन सब चीजों को इकट्ठा करके एक जगह रख ले सबसे पहले किसान पानी का डर्म ले पानी के ढोल / टैंक में 50 लीटर के लगभग पानी डाले , सबसे पहले ढोल में पानी के साथ 10 किलो गाय का गोबर डाले ,

 

गोबर के बाद 10 किलो गोमूत्र भी डाले , इन सब को डालने के बाद सब को अच्छी तरह से पानी में घोल लेना चाहिए , सब को घोलने के बाद इनमे 1 किलो पीपल के निचे की मिटटी भी मिला दे ,

 

इसमें 2 किलो पुराना गुड़ भी डाल दे और 2 किलो बेसन भी ढोल में दाल दे , अब इन सब को अच्छी तरह से घडी की सुई की दिशा में डण्डे की सहायता से हिलाते हुये मिक्स कर ले ,

 

अब 200 लीटर के ढोल को पूरा पानी की सहायता से भर ले और अच्छी तरह डण्डे से मिक्स कर ले , अब ढोल को कपडे से ढक दे , जीवामृत के ढोल को ऐसी जगह रखे जहा हमेशा छाया होनी चाहिये

 

अब डेली इस ड में रखे जीवामृत के घोल को सुबह – शाम लखड़ी के डण्डे की सहायता से घडी की सुई की दिशा में अच्छी तरह हिलाये यह कार्य 7 से 8 दिन तक डेली करना हे

 

8 दिन के लगभग यह बनकर तैयार हो जाता हे 200 लीटर के ईस घोल को हम एक एकड़ भूमि तक काम में ले सकते हे

किसी भी पुराने पेड़, बरगद, पीपल के निचे की 1 किलो मिट्टी भी काम में ले सकते हैं

फलदार पौधों में एक पौधे में 1 लीटर 15 दिन के अंतराल पर डालना चाहिए

 

 

 

 

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